प्रभू श्रीराम जी ने इस कारण त्याग दिया था अपना मानव शरीर?


Image Source: Wikipedia


यह तो आप सभी जानते है, की अयोध्या ही रामलला की असली जन्मभूमि है। लेकिन क्या आप यह जानते हो, कि आखिरकार प्रभु श्रीराम की मृत्यु कैसे हुई थी?

आपको अधिक जानकारी के लिए बता दूं, की भगवान श्रीराम जी ने इस धरती पर कई हजार सालों तक राज करके शासन किया और पृथ्वीं पर धर्म की स्थापना की। लेकिन उनके जीवन काल में एक समय ऐसा भी आया जब भगवान श्रीराम को अपने प्राणों का त्याग करना पड़ा यदि आप भी जानना चाहते हैं, कि क्यों भगवान श्रीराम ने अपने प्राण त्याग दिया। तो आइए चलिए जान लेते हैं, की किस कारण से भगवान श्रीराम को करना पड़ा अपने प्राणों का त्याग? 

प्रभू श्रीराम जी की मृत्यु का रहस्य..

वेद पुराण और शास्त्रों में लिखी बातों को आधार मानकर चला जाय तो, प्रभू श्रीराम जी ने वैसे तो धरती पर 1000 वर्षों से भी ज्यादा समय तक उनका शासन रहा है। अपने इस लंबे शासकाल में प्रभू श्रीराम जी ने कई ऐसे काम किए हैं। जिन्होंने हिंदू धर्म के लोगो के लिए एक गौरवमयी इतिहास प्रदान किया है। पद्मपुराण में उल्लेखित बातों के अनुसार एक दिन एक वृद्ध संत प्रभू श्रीराम जी के दरबार में पहुंचे और उनसे अकेले में मिलने और चर्चा करने का निवेदन किया। उस संत के मिलने के आवेदन को स्वीकार करते हुए प्रभु श्रीराम जी उन्हें अपने कक्ष में ले गए और द्वार पर अपने छोटे भाई लक्ष्मण को पहरेदारी के लिए खड़ा कर दिया और कहा कि यदि उनके और उस संत के बीच की मुलाकात और चर्चा के बीच में कोई आएगा तो वह स्वंय ही उसे मृत्यु दंड की शिक्षा देंगे।

लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई की आज्ञा का पालन करते हुए दोनों को उस कमरे में एकांत में छोड़ दिया और खुद बाहर पहरा देने लगे। वह वृद्ध संत कोई और नहीं बल्कि विष्णु लोक से भेजे गए यम देव थे। जिन्हें प्रभु राम को यह बताने के लिए भेजा गया था, कि उनका धरती पर का जीवन कार्यकाल पूर्ण हो चुका है, और उन्हें अब अपने लोक में पुनः लौटना होगा। लेकिन उसी समय अचानक में द्वार पर ऋषि दुर्वासा आ गए। उन्होंने लक्ष्मण से कक्ष के अंदर जाने के लिए कहा लेकिन लक्ष्मण ने उन्हें साफ मना कर दिया। ऋषि दुर्वासा को उनके क्रोध के लिए जाना जाता था। 

लक्ष्मण के बार- बार मना करने पर भी ऋषि दुर्वासा अपनी बात से पीछे नहीं हट रहे थे और भीतर जाने की अपने जिद पर अड़े हुए थे, और अंत में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को श्राप देने की चेतावनी दे दी। इसके बाद लक्ष्मण की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई। वह इतने असमंजस पड गए थे, कि वह अपने भाई की आज्ञा का पालन करें या फिर उन्हें श्राप मिलने से बचाएं। और फिर बाद में लक्ष्मण ने सोच समझकर एक कठोर फैसला लिया और अपने प्राणों की चिंता न करते हुए वह सीधे प्रभू श्रीराम के पास पहुंच गए। लक्ष्मण को चर्चा में बाधा डालते देख श्री राम ही दुविधा में पड़ गए क्यों की लक्ष्मण ने बिना बताए स्वयं भीतर आ गए थे, जब की प्रभू श्रीराम जी ने उन्हे किसी को भी भीतर आने के लिए मना किया था।

एक तरफ स्वयं प्रभू श्रीराम अपने फैसले से मजबूर थे तो दूसरी तरफ भाई के प्यार से मजबूर थे। उस समय श्रीराम जी ने अपने भाई को मृत्यु दंड देने के स्थान पर उन्हे राज्य एवं देश छोड़कर बाहर निकल जाने के लिए कहा। उस काल में देश निकाला मृत्यु के समान ही माना जाता था। लेकिन अपने भाई द्वारा यह सब सुनने के बाद लक्ष्मण ने इस दुनिया को छोड़ने का फैसला लिया। वह सरयू नदी के पास गए और नदी के अंदर जाते ही वह शेषनाग के अवतार में बदल गए और विष्णु लोक चले गए। 

अपने भाई के यूं अचानक चले जाने से प्रभु श्रीराम काफी उदास और चिंतित रहने लगे। जिस प्रकार राम के बिना लक्ष्मण नहीं रह सकते थे, उसी प्रकार लक्ष्मण के बिना राम भी नहीं रह सकते थे। इसलिए उन्होनें भी यह निर्णय लिया की अब वह भी इस लोक से सब मोह माया छोड़कर चले जाने का विचार बनाया। तब प्रभु श्री राम ने अपना राज पाठ और पद अपने पुत्रों को और अपने भाई के पुत्रों को सौंप दिया और सरयु नदी की ओर चल दिए। जिसके बाद प्रभु श्रीराम ने सरयु नदी में जाकर जल समाधि ले ली और उसके बाद उस नदी से भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने अपने भक्तों को दर्शन दिए।  

अंततः प्रभु श्रीराम के मौत की दो प्रचलित कथाएं ?

प्रभु श्रीराम की मृत्य से जुड़ी दो कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार सीता ने अपने दोनों बच्चों लव और कुश को प्रभु श्रीराम को सौंपा और धरती माता में समा गईं थी। सीता के जाने से प्रभु श्रीराम इतने दुखी हो गए कि उन्होंने स्वयं यमराज से सहमति लेकर सरयू नदी में जल समाधी ले ली। 

यह आर्टिकल आपको कैसा लगा नीचे Comment Box में अपनी राय लिखकर जरूर बताएं। अभी तक के लिए इतना ही, यह लेख यही पर समाप्त करके आपसे हाथ जोड़कर विदा लेता हूं। फिर मिलेंगे आपसे अगले अध्याय में।🙏



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपना किमती समय निकालकर यह आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। 🙏